| क्रम | पुरस्कार का नाम | स्थापना वर्ष | क्षेत्र | पुरस्कार राशि | विशेष / महत्वपूर्ण तथ्य |
| 1 | कालिदास सम्मान | 1980-81 | शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगकर्म और रूपंकर कला | ₹5,00,000 | प्रारम्भ में अलग-अलग क्षेत्रों में दिया जाता था, अब सभी विधाओं में प्रदान किया जाता है। |
| 2 | तानसेन सम्मान | 1980 | शास्त्रीय संगीत | ₹5,00,000 | ग्वालियर के 'तानसेन समारोह' के दौरान दिया जाता है। |
| 3 | लता मंगेशकर सम्मान | 1984 | सुगम संगीत | ₹5,00,000 | इंदौर में जन्मी महान गायिका लता मंगेशकर के सम्मान में प्रारम्भ। |
| 4 | कुमार गंधर्व सम्मान | 1992-93 | शास्त्रीय संगीत | ₹2,51,000 | केवल 'युवा कलाकारों' (25 से 45 वर्ष) को प्रोत्साहित करने हेतु। |
| 5 | किशोर कुमार सम्मान | 1997 | पटकथा, अभिनय, गीत लेखन एवं निर्देशन | ₹5,00,000 | फिल्म क्षेत्र की विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट कार्य के लिए। |
| 6 | राजा मानसिंह तोमर सम्मान | 2011 | संगीत, संस्कृति एवं कला का संरक्षण | ₹1,00,000 | यह सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि 'संस्थाओं' को दिया जाता है। |
| 7 | कवि प्रदीप सम्मान | 2012 | मंच एवं गीत रचना | ₹2,00,000 | राष्ट्रभक्त कवि प्रदीप की स्मृति में 'गीत रचना और लेखन' हेतु। |
| क्रम | पुरस्कार का नाम | स्थापना वर्ष | क्षेत्र | पुरस्कार राशि | विशेष / महत्वपूर्ण तथ्य |
| 8 | महात्मा गांधी सम्मान | 1995 | गांधीवादी दर्शन, अहिंसा और सामाजिक उत्थान | ₹20,00,000 | यह मध्य प्रदेश शासन का सबसे बड़ा पुरस्कार है। (केंद्र का योगदान ₹1 करोड़ तक संभव)। |
| 9 | शिखर सम्मान | 1980 | साहित्य, कला, संगीत और संस्कृति | ₹2,00,000 | यह कुल 8 विधाओं में उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है। |
| 10 | मैथिलीशरण गुप्त सम्मान | 1987 | हिन्दी साहित्य | ₹5,00,000 | खड़ी बोली हिन्दी के साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदान किया जाता है। |
| 11 | कबीर सम्मान | 1986 | भारतीय भाषाओं की कविता | ₹5,00,000 | संविधान की 8वीं अनुसूची की किसी भी भारतीय भाषा की कविता के लिए। |
| 12 | इकबाल सम्मान | 1986 | उर्दू साहित्य | ₹5,00,000 | उर्दू साहित्य के रचनात्मक लेखन के लिए देश का प्रतिष्ठित पुरस्कार है। |
| 13 | शरद जोशी सम्मान | 1992-93 | व्यंग्य, संस्मरण, ललित निबंध और डायरी | ₹5,00,000 | प्रसिद्ध व्यंग्यकार शरद जोशी की स्मृति में हिन्दी व्यंग्य विधा के लिए। |
| क्रम | पुरस्कार का नाम | स्थापना वर्ष | पात्रता (विशेष) | क्षेत्र | पुरस्कार राशि | विशेष / महत्वपूर्ण तथ्य |
| 1 | तुलसी सम्मान | 1983 | केवल पुरुष कलाकार | आदिवासी, लोक एवं पारंपरिक कला | ₹5,00,000 | लोक कलाओं के संरक्षण में इसे 'मील का पत्थर' माना जाता है। |
| 2 | देवी अहिल्याबाई सम्मान | 1996 | केवल महिला कलाकार | आदिवासी, लोक एवं पारंपरिक कला | ₹5,00,000 | इंदौर की लोकमाता देवी अहिल्याबाई की स्मृति में 'नारी शक्ति' के सम्मान हेतु। |
| क्रम | पुरस्कार का नाम | स्थापना वर्ष | क्षेत्र | पुरस्कार राशि | विशेष / महत्वपूर्ण तथ्य |
| 1 | विष्णु श्रीधर वाकणकर सम्मान | 2005-06 | पुरातात्विक खोज एवं संरक्षण | ₹2,00,000 | भीमबेटका के खोजकर्ता डॉ. वाकणकर की स्मृति में शोधार्थियों को दिया जाता है। |
| 2 | चन्द्रशेखर आजाद सम्मान | 2006-07 | सामाजिक उत्थान एवं देशभक्ति | ₹2,00,000 | महान क्रांतिकारी आज़ाद के बलिदान की स्मृति में समाज सेवा हेतु। |
| 3 | टंट्या भील पुरस्कार | 2008 | खेल (जनजातीय प्रतिभा) | ₹1,00,000 | जनजातीय युवाओं को खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने हेतु। |
| 4 | ठक्कर बप्पा पुरस्कार | 2008-09 | जनजातीय सामाजिक सेवा | ₹2,00,000 | आदिवासियों के उत्थान के लिए निस्वार्थ सेवा करने वाले समाजसेवियों हेतु। |
| क्रम | समारोह का नाम | स्थापना / समय | मुख्य क्षेत्र | विशेष / महत्वपूर्ण तथ्य |
| 1 | लोकरंग समारोह | 1986 (26 जनवरी से शुरू) | लोक कला एवं जनजातीय विरासत | यह 5 दिवसीय उत्सव है जो गणतंत्र दिवस पर आयोजित होता है। इसका उद्देश्य लुप्त हो रही संस्कृतियों को मंच देना है। |
| 2 | दुर्लभ वाद विनोद | प्राचीन संगीत संरक्षण हेतु | प्राचीन वाद्य यंत्र वादन | इसमें विलुप्त हो रहे प्राचीन वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन किया जाता है। इसका आयोजन उस्ताद अलाउद्दीन खाँ अकादमी द्वारा होता है। |
| 3 | अनुगूंज समारोह | शिक्षा विभाग द्वारा (हाल ही में) | स्कूली शिक्षा और कला का संगम | सरकारी स्कूलों के बच्चे कला, संगीत और नाटक का प्रदर्शन करते हैं। यह छात्रों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है। |
| 4 | भोजपाल उत्सव | ऐतिहासिक महत्व हेतु | व्यापार, कला एवं क्षेत्रीय संस्कृति | यह राजा भोज की नगरी की ऐतिहासिकता और भोपाल की 'गंगा-जमुनी' तहजीब को समर्पित एक बड़ा मेला और उत्सव है। |
| 5 | राग भोपाली | हस्तशिल्प प्रोत्साहन हेतु | जरी-जरदोजी और बुनकर कला | इसका मुख्य उद्देश्य भोपाल की प्रसिद्ध 'जरी-जरदोजी' कला को वैश्विक पहचान दिलाना और शिल्पियों को बाजार उपलब्ध कराना है। |
| क्रम | समारोह का नाम | स्थापना / समय | मुख्य क्षेत्र | विशेष / महत्वपूर्ण तथ्य |
| 1 | तानसेन समारोह | 1924 (25 से 29 दिसंबर) | शास्त्रीय संगीत (Hindustani Classical) | यह मध्य प्रदेश का सबसे पुराना समारोह है। ग्वालियर के 'बेहट' गाँव में तानसेन की याद में आयोजित होता है। |
| 2 | भवभूति समारोह | महान नाटककार भवभूति के सम्मान में | संस्कृत साहित्य एवं नाट्य कला | यह मुख्य रूप से ग्वालियर और भिंड क्षेत्र में आयोजित होता है। इसमें 'उत्तररामचरित' जैसी रचनाओं पर चर्चा और मंचन किया जाता है। |
| क्रम | समारोह का नाम | स्थापना / समय | मुख्य क्षेत्र | विशेष / महत्वपूर्ण तथ्य |
| 1 | कालिदास समारोह | 1958 (7 दिवसीय) | संस्कृत साहित्य एवं शास्त्रीय कलाएँ | यह देव प्रबोधिनी एकादशी से शुरू होता है। इसमें कालिदास की कृतियों (जैसे मेघदूतम्) पर शोध और नाट्य प्रस्तुतियाँ होती हैं। |
| 2 | टेपा समारोह | स्थानीय परंपरा | हास्य-व्यंग्य | यह उज्जैन का सबसे अनूठा समारोह है। इसमें देश के बड़े व्यंग्यकार हिस्सा लेते हैं और सामाजिक विसंगतियों पर हास्य के माध्यम से प्रहार करते हैं। |
| 3 | मालवा उत्सव | 1991 (5 दिवसीय) | लोक संस्कृति एवं हस्तशिल्प | उज्जैन के साथ यह इंदौर और मांडू में भी आयोजित होता है। इसका मुख्य आकर्षण यहाँ का 'शिल्प बाजार' है। |
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